परिचय

‘गांधी विचार शृंखला – 3’ तीन दिवसीय राष्ट्रीय अकादमिक संवाद श्रृंखला थी, जिसका उद्देश्य महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा डॉ. राममनोहर लोहिया के नैतिक, सामाजिक और राजनैतिक विचारों का अध्ययन एवं उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर विमर्श करना था। यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परम्परा अध्ययन पीठ द्वारा आयोजित किया गया, जिसने आईटीएम विश्वविद्यालय की इस प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया कि भारतीय दार्शनिक परम्परा और आधुनिक अकादमिक विमर्श के बीच निरंतर संवाद स्थापित करना आवश्यक है।

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अकादमिक सत्र

विषयवस्तु का विस्तार

तीन दिनों में आयोजित आठ विषयगत सत्रों में देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए विद्वानों ने भारतीय ज्ञान और नैतिक चिंतन की ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक तथा दार्शनिक धाराओं पर गहन विचार-विमर्श किया। पहले दिन के सत्रों में इतिहास और राजनीति के आयामों पर विमर्श हुआ, जिनमें गांधी की नैतिक इतिहास-दृष्टि तथा नेहरू और लोहिया की लोकतांत्रिक-सामाजिक दृष्टियों को समझा गया।

दूसरे दिन के सत्रों में आर्थिक चिंतन, विश्व दृष्टि तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नैतिकता पर विचार हुआ, जिनमें ट्रस्टीशिप, सतत विकास और वैज्ञानिक मूल्यबोध के प्रश्नों को केंद्र में रखा गया। तीसरे दिन के सत्रों में संघर्ष-प्रबंधन, शांति, नेतृत्व और स्त्री दृष्टि जैसे विषयों पर विचार हुआ, जिनमें समावेशिता, न्याय और सामाजिक परिवर्तन पर बल दिया गया।

अध्यक्षता और सहभागिता

सत्रों की अध्यक्षता देश के ख्यातनाम शिक्षाविदों ने की - जिनमें प्रो. एस.डी. मुनी, प्रो. आनन्द कुमार, प्रो. राजकुमार जैन, प्रो. सलिल मिश्रा, प्रो सुचेता महाजन प्रो बोध प्रकाश तथा आईटीएम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय प्रमुख हैं। चौबीस से अधिक वक्ताओं ने अपने शोध एवं विचार प्रस्तुत किए, जिनके पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्रों ने छात्रों और अध्यापकों को सक्रिय सहभागिता का अवसर प्रदान किया।

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सांस्कृतिक एवं विद्वत्तापरक प्रमुख आयोजन

पुस्तक प्रदर्शनी और प्रकाशन

महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया से संबंधित पुस्तकों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें दुर्लभ प्रकाशनों तथा समीक्षात्मक रचनाओं का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर दो महत्त्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण भी किया गया
  • “Revisiting Ram Manohar Lohia” (अंग्रेज़ी) तथा उसका हिन्दी अनुवाद “लोहिया: एक पुनर्पाठ” (अनुवादक: प्रो. संजय जोठे), और
  • “राममनोहर लोहिया की सांस्कृतिक दृष्टि” (हिन्दी में, संकलन एवं संपादन: श्री रमाशंकर सिंह, माननीय संस्थापक कुलाधिपति, आईटीएम विश्वविद्यालय)

ये प्रकाशन डॉ. लोहिया की बौद्धिक परम्परा के पुनर्पाठ एवं उसके समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापन की दिशा में महत्त्वपूर्ण अकादमिक योगदान हैं।

नाट्य प्रस्तुति – “गोमांतक”

श्रृंखला के दौरान हिंदी नाटक “गोमांतक” का मंचन किया गया, जिसका निर्देशन श्री संजय जादौन ने किया। यह नाट्य प्रस्तुति गांधीवादी आदर्शों की कलात्मक व्याख्या थी, जिसमें साहित्य, नाटक और दर्शन के संगम के माध्यम से नैतिकता और सौंदर्यशास्त्र का सजीव समन्वय प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति को अध्यापकों और विद्यार्थियों दोनों ने अत्यंत सराहा।

प्रतियोगिताएँ और सम्मान समारोह

कार्यक्रम के अंतर्गत आईटीएम विश्वविद्यालय एवं आईटीएम ग्लोबल स्कूल द्वारा निबंध, चित्रकला और वीडियो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं का विषय गांधीवादी मूल्यों - सत्य, अहिंसा और सामाजिक सद्भाव - से संबंधित था। समापन सत्र में प्रतियोगिता विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिससे युवाओं में रचनात्मक और नैतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिला।

परिणाम एवं महत्त्व

विचारात्मक प्रभाव

गांधी विचार शृंखला ने लोकतंत्र, समानता, शांति और सतत विकास जैसे विषयों पर गहन अंतःविषयी विमर्श की परम्परा को सशक्त किया। इन विचार-सत्रों ने नैतिक दर्शन और सामाजिक यथार्थ के बीच एक जीवंत सेतु निर्मित किया, यह दर्शाते हुए कि गांधी, नेहरू और लोहिया के विचार आज भी भारत के राजनीतिक और नैतिक विमर्श को दिशा प्रदान करते हैं।

शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक योगदान

इस श्रृंखला ने आईटीएम विश्वविद्यालय की उस भूमिका को पुनः रेखांकित किया, जो ज्ञान को नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ती है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक ऐसा मंच बना, जहाँ शिक्षा को सत्य, सहानुभूति और रचनात्मकता के संवाद के रूप में देखा गया। व्याख्यानों, कला और नाटक के समन्वय ने इस विचार को पुष्ट किया कि नैतिक शिक्षा केवल पुस्तकीय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी अंग है।

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